भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच हो और रोमांच अपने चरम पर ना हो ऐसा होना असम्भव होता था लेकिन चैम्पियंस ट्राॅफी के फाइनल मैच में पाकिस्तान ने भारत को सभी मौकों पर पीछे धकेल कर रखा। एक और जहां विश्व की दूसरी रैकिंग वाली चैम्पियन भारत मैदान में उतरी थी तो वहीं ट्राॅफी में सबसे पिछड़ी नम्बर 8 की पाकिस्तान को मुकाबला करना था। भारत ने टाॅस जीतकर पाकिस्तान को बल्लेबाजी के लिए आंमत्रित किया लेकिन ये 5 अहम कारण भारत की हार के सूत्रधार बन गये।
जसप्रीत बुमराह – भारत के इस तेज गेंदबाज ने 9 ओवर में 68 रन दिये जिसमें 3 नो बाॅल भी शामिल हैं। जसप्रीत बुमराह मैच का सबसे टर्निंग पाइन्ट साबित हुए जब महज 4 रन के निजी स्कोर पर उन्होंने पाकिस्तान के शतकवीर फखर जमां को धोनी के द्वारा कैव करा दिया और वो नो बाॅल हो गई। उस गोल्डन चांस के बाद पाकिस्तान के बल्लेबाजों ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और 338 रन का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया।
रविचन्द्रन अश्विन – भारत के अहम विकेट टेकर बाॅलर अश्विन एक बाॅल भी ऐसी नहीं फेंक पाये जो पाकिस्तान के बल्लेबाजों को विचलित कर सके। अश्विन ने 10 ओवर में बिना किसी सफलता के 70 रन लुटाये और पाकिस्तान के युवा बल्लेबाजों के सामने असहज बनकर गेंदबाजी करते रहे।
रविन्द्र जडेजा – जब-जब भारतीय कप्तान जडेजा के हाथ में बाॅल थमाते थे तो ये आकर्षक बाॅलर भारत की झोली में ब्रेक थ्रो डाल देता था लेकिन फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ जडेजा ने 8 में बिना किसी सफलता के 67 रन दिये। यहीं नहीं जडेजा की ही गलती से हार्दिक रन आउट हो गये और भारत की अंतिम उम्मीद बुझ गयी।
विराट कोहली – बतौर बल्लेबाज विराट ने निराश किया हो लेकिन भारतीय फील्डिंग के दौरान उनके कुछ गलत निर्णय हार में तब्दील गये। अपने पहले स्पैल में जिस तरह भुवनेश्वर कुमार ने आकर्षित करते हुए 5 ओवर में सिर्फ 10 रन दिये थे ऐसे में भुवनेश्वर को बीच में खास कर फाखर जमां के शतक के दौरान ना लाकर जीत को तोहफे में देना जैसा लग रहा था। जब भुवनेश्वर अपने दूसरे स्पैल में गंेदबाजी करने आये तो पाकिस्तान जीत की इबारत लिख चुकी थी।
महेंद्र सिंह धोनी – कोहली के ग्राउन्ड से जाने के बाद धोनी को कुछ देर कार्यवाहक कप्तान की भूमिका निभानी पड़ी लेकिन विश्व के सबसे सफल कप्तान रह चुके धोनी नाकाम बाॅलर अश्विन और जडेजा को रिपीट करते रहे और समय निकलने के बाद केदार जाधव को बाॅल सौंपी। यदि ये प्रयास कुछ देर पहले कर लिया जाता तो शायद पाकिस्तान को 300 रन तक रोका जा सकता था। वहीं बल्लेबाजी में भी धोनी अपना विकेट गिफ्ट करके जल्दी पवेलियन लौट गये थे।