उत्तराखंड क्रांति दल के केन्द्रीय अध्यक्ष पुष्पेश त्रिपाठी ने कहा कि कर्णप्रयाग विधानसभा सीट उत्तराखंड क्रान्ति दल के लिये बहुत मायने रखती है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इस जमीन ने हमें राजनीतिक चेतना दी है। जब उत्तराखंड क्रान्ति दल अपने जनांदोलनों के माध्यम से राज्य के सवाल को उठा रहा था तब गैरसैंण हमारे लिये किसी तीर्थ से कम नहीं था। हम अपनी राजनीतिक समझ और विकास के विकेन्द्रीकरण का रास्ता गैरसैंण से ही निकालते थे। जब 1987 में उत्तराखंड क्रान्ति दल ने अपना पहला घोषणा पत्र जारी किया तो उसमें सबसे पहले गैरसैंण को राजधानी बनाने की बात कही थी। नब्बे के दशक में 14 जनवरी 1992 को पार्टी ने सरयू-गोमती के तट पर उत्तरायणी के अवसर पर अपना ब्लू प्रिंट जारी किया, जिसमें उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना को लोगों के सामने रखा गया। राज्य की अवधारणा का सबसे महत्वपूर्ण बिन्दु था राजधानी का। उक्रांद ने कहा कि हम गैरसैंण को राज्य की राजधानी बनायेंगे। इस घोषणा के बाद 24-25 जुलाई 1992 को अपने द्विवार्षिक सम्मेलन में उक्रांद ने पेशावर विद्रोह के नायक वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली के नाम पर गैरसैंण का नाम ‘चन्द्रनगर’ रखा और इसे राज्य की राजधानी घोषित किया। यहां रामलीला मैदान के पास वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली की आदमकद प्रतिमा के लिये स्थल का शिलान्यास किया। इस अवसर पर उत्तराखंड के अलावा देश के जाने-माने आंदोलनकारी भी उपस्थित थे जिनमें झारखंड मुक्ति मोर्चा के तत्कालीन उपाध्यक्ष और सांसद सूरज मंडल भी शामिल हुये। इसी वर्ष 25 दिसंबर को वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली की सौवीं जयन्ती पर उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित की गई। इस प्रकार हमने इसे जनता की भावनाओं के अनुरूप ‘पहाड़ की राजधानी पहाड़ में’ के विचार को मूर्त रूप दिया। हमारा मानना था कि गैसैंण को एक नया शहर बनाकर हम इसके आसपास के पचास किलोमीटर के क्षेत्रा को विसित कर विकास के विकेन्द्रीकरण रास्ता साफ करेंगे। गैरसैंण को राजधानी बनाने के पीछे हमारा एक ही लक्ष्य था कि कत्यूरों, चंदो, पंवारों से लेकर अंग्रेजों ने पहाड़ में नये शहरों का निर्माण किया। जोशीमठ, बैजनाथ, श्रीनगर, टिहरी, अल्मोड़ा, चंपावत, नैनीताल, मसूरी, लैसंडाउन, देहरादून जैसे शहर विकास के विकेन्द्रीकरण के नमूने थे। अंग्रेजों के जाने के बाद पहाड़ में एक भी नया शहर नहीं बसा। हम गैरसैंण को उत्तराखंड के विकास के विकेन्द्रीकरण नया शहर बनाना चाहते थे। इसलिये हमने इस राज्य की राजधानी के रूप में चुना। हम इसे एक विश्वस्तरीय पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करना चाहते थे।