नई दिल्ली: मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने नीति आयोग की बैठक में प्रतिभाग करते हुए पर्वतीय राज्यों के लिए विकास की दृष्टि से अलग मंत्रालय या नीति आयोग में ही प्रकोष्ठ बनाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके साथ ही उन्होंने राज्य की भौगोलिक स्थिति, अन्तर्राष्ट्रीय सीमा एवं संवेदनशीलता, सामरिक महत्व के दृष्टिगत अवस्थापना सुविधाओं पर जोर दिया और पलायन को गंभीर समस्या बताया।
रविवार को राष्ट्रपति भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में विभिन्न मुद्दों पर राज्य से संबंधित जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 337 से अधिक गांवों के पुनस्र्थापन के लिए विशेष पैकेज, पर्यावरणीय सेवाओं के लिए उत्तराखंड को 4 हजार करोड़ रूपए प्रतिवर्ष का ग्रीन बोनस, 14 वें वित्त आयोग की संस्तुतियों से हुई हानि की क्षतिपूर्ति के लिए स्पेशल प्रोजेक्ट के तहत प्रतिवर्ष 2 हजार करोड़ रूपए की आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाए जाने का अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि उत्तराखंड में जल्द ही एस.जी.एस.टी.(स्टेट गुड्स एंड सर्विस टैक्स) को राज्य विधानसभा से पास करवाया जाएगा। पंद्रह वर्षीय विजन के तहत राज्य के सामाजिक व आर्थिक विकास के लिए बागवानी/जैविक कृषि, पर्यटन, ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी, वानिकी व जड़ी-बूटी/आयुष कुल 6 ग्रोथ इंजन चिन्हित किए गए हैं। वर्ष 2020 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लिए जैविक कृषि, दलहनी खेती में आत्मनिर्भरता, बीज प्रतिस्थापन में वृद्धि, कृषि विपणन, वैज्ञानिक कृषि पर विशेष रूप से बल दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने मोबाईल कनेक्टीवीटी से अछूते रह गए 3086 गांवों को मोबाईल कनेक्टीवीटी से जोड़े जाने के लिए दूरसंचार विभाग को निर्देशित किए जाने का भी अनुरोध किया ताकि ‘डिजिटल इंडिया’ के विजन को साकार किया जा सके। भागीरथी इको सेंसिटीव जोन में स्टीप स्लोप के लिए 20 डिग्री के क्राॅस स्लोप के स्थान पर 60 डिग्री का क्राॅस स्लोप करने के लिए आवश्यक संशोधन किया जाए।
मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि राज्य द्वारा मुख्य रूप से 15 वर्षीय विजन प्राप्त करने के लिए वर्तमान उच्च आर्थिक विकास दर को बनाये रखने, अन्र्तक्षेत्रीय विषमताओं को दूर करने, दीर्घकालीन आजीविका व्यवस्था को सुदृढ करने हेतु कृषि तथा औद्यानिक क्षेत्र को मुख्य रणनीति के रूप में रूपान्तरित करने, अर्धविकसित शहरों को स्थायी रूप से विकसित करने, पर्वतीय क्षेत्रों में सड़कों, रेलवे, वायुमार्ग तथा संचार कनेक्टीवीटी को प्रभावी बनाने, राज्य के मानव संसाधन को उचित शिक्षा एवं कौशल प्रशिक्षण प्रदान करके रोजगारपरक बनाने, सामाजिक तथा लैंगिक असमानताओं को दूर करने हेतु महिलाओं एवं समाज के पिछड़े वर्ग का सशक्तिकरण सुनिश्चित करने तथा दीर्घ कालीन पर्यावरणीय व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु ऊर्जा के नवीनीकरणीय स्रोतों को बढ़ावा देने का संकल्प लिया गया है। राज्य के समाजार्थिक विकास हेतु बागवानी/जैविक कृषि, पर्यटन, ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी, वानिकी तथा जड़ी-बूटी एवं आयुष/आयुर्वेदिक फार्मा के 06 गा्रेथ इंजन चिन्हित किये गये है।