केदारनाथ: आगामी 3 मई को प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने के अवसर पर पूजा-अर्चना में शामिल होंगे। उनके आगमन के लिए पूरा शासन-प्रशासन मुस्तैदी के साथ तैयारियों में जुटा हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ये यात्रा कई मायनों में खास होने वाली है। 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बनने से पूर्व नरेंद्र मोदी उत्तराखण्ड भाजपा के प्रदेश प्रभारी थे। जब केशवभाई पटेल के गिरते स्वास्थ्य और उपचुनाव में भाजपा की हार की पार्टी हाईकमान द्वारा चिंता की गयी तो नये सीएम के लिए नरेंद्र मोदी के नाम पर विचार हुआ। नरेंद्र मोदी को जब तत्कालीन प्रधामंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा इन सब विचार विमर्श के लिए दिल्ली बुलाया गया तो उस समय नरेंद्र मोदी गढ़वाल यात्रा के लिए उत्तराखण्ड आये हुए थे। उत्तराखण्ड से जाने के बाद हफ्तें भर में ही नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर कार्यभर ग्रहण कर लिया था। ऐसे में ये कहा जाता है कि नरेंद्र मोदी आज भी इन ऊंचाइयों पर पहुंचने के लिए बाबा केदार यानि भगवान शिव की कृपा मानते हैं। इसके अलावा 2013 में केदारनाथ में आयी भीषण आपदा के दौरान बतौर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने केदारनाथ के जीर्णोद्वार का सारा खर्च गुजरात सरकार द्वारा उठाने के लिए तत्कालीन कांग्रेस के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के समक्ष प्रस्ताव भेजा लेकिन उसे राजनीतिक कारणवश ठुकरा दिया गया। उसके बाद 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने हिमालय राज्यों के लिए विशेष योजनाओं की घोषणा की लेकिन प्रदेश में कांग्रेस की सरकार से तालमेल नहीं बन पाया। फिर 2017 विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान परिवर्तन रैली में चारधाम के लिए आॅल वेदर रोड की घोषणा की गयी और रैली को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि प्रदेश को डबल इंजन की जरूरत है। ऐसे में भाजपा की रणनीति या मोदी फेस, दोनों में से वजह कोई भी लेकिन विकास के लिए डबल इंजन जरूर लग चुका है। ये दौरा इसलिए भी खास बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केदारनाथ के जीर्णोद्वार के लिए कोई बड़ी घोषणा कर सकते हैं।