(मौ. वसी जैदी)
भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम में उत्तराखंड के 4 बड़े नेताओं को जगह मिली है। इस नई टीम में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को भी शामिल किया गया है। तीरथ सिंह रावत को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गयी है। लोकसभा चुनाव 2024 में गढ़वाल से टिकट ना मिलने के बाद तीरथ सिंह रावत के पास पार्टी में कोई जिम्मेदारी नहीं थी, अब करीब दो साल के बाद तीरथ सिंह रावत फिर सक्रिय राजनीति में आ गये हैं। एक बार फिर उनके घर पर बधाई देने वालों को तांता लगना शुरू हो गया है। ये उनकी राजनीति का अंदाज है कि किनारे होते-होते तीरथ सिंह रावत मुख्यधारा में आ जाते हैं।
तीरथ सिंह रावत का राजनीतिक सफर तीन दशकों से अधिक पुराना है। छात्र राजनीति और संगठन से शुरू हुआ उनका सफर उत्तर प्रदेश विधान परिषद से होते हुए उत्तराखंड के गठन के बाद पहली सरकार में मंत्री, विधायक, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष, राष्ट्रीय सचिव, लोकसभा सांसद और मुख्यमंत्री तक पहुंचा। अब राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी उनके राजनीतिक सफर में एक नया अध्याय जोड़ती है।
तीरथ सिंह रावत का राजनीतिक जीवन मूलतः संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़ा रहा है। उत्तराखंड राज्य बनने से पहले वे उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य रहे। उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड के अनुसार 1997 से 2002 तक वे उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य रहे। उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद वर्ष 2000 में उन्हें नवगठित राज्य की पहली सरकार में शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी मिली और वे 2000 से 2002 तक इस पद पर रहे।
2007 में उन्हें उत्तराखंड भाजपा का प्रदेश महामंत्री बनाया गया। इसके साथ ही वे प्रदेश चुनाव अधिकारी और प्रदेश सदस्यता प्रमुख जैसी संगठनात्मक जिम्मेदारियों से भी जुड़े। संगठन में काम करने के अनुभव ने आगे चलकर उनकी राजनीतिक भूमिका को मजबूत आधार दिया।
वर्ष 2012 में तीरथ सिंह रावत चैबट्टाखाल विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए।
वर्ष 2013 में उन्हें उत्तराखंड भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। वे दिसंबर 2015 तक इस पद पर रहे। यह उनके राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण दौर था लेकिन वर्ष 2017 में चैबट्टाखाल से पार्टी ने उनका टिकट काटकर कांग्रेस से भाजपा में आए सतपाल महाराज को उम्मीदवार बनाया। तीरथ सिंह रावत ने पार्टी के इस निर्णय को स्वीकार किया और पार्टी ने उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय सचिव बना दिया।
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने तीरथ सिंह रावत को पौड़ी गढ़वाल लोकसभा सीट से मैदान में उतारा। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी मनीष खंडूड़ी को बड़े अंतर से पराजित किया और पहली बार लोकसभा पहुंचे।
तीरथ सिंह रावत के राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा मोड़ 10 मार्च 2021 को आया, जब उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वे उत्तराखंड के दसवें मुख्यमंत्री बने। मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल हालांकि बहुत छोटा रहा। संवैधानिक और चुनावी परिस्थितियों के चलते उन्हें कुछ महीनों बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद पुष्कर सिंह धामी को राज्य की कमान सौंपी गई।
वर्ष 2024 में तीरथ सिंह रावत को गढ़वाल लोकसभा सीट से प्रत्याक्षी नहीं बनाया गया। उनके स्थान पर अनिल बलूनी को पार्टी ने मैदान में उतारा और उन्होंने भी उस सीट से जीत हासिल की। 2024 से तीरथ सिंह रावत सक्रिय राजनीति से लगभग दूर थे। अब एक बार पार्टी ने उनकी अहमियत को समझा है और: भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है।

तीरथ सिंह रावत की राजनीति इसी तरह चैंकाती है। वर्ष 2015 में वो उत्तराखंड भाजपा के अध्यक्ष थे और 2017 में ही उनका चैबट्टाखाल से टिकट काटकर सतपाल महाराज को दे दिया गया था और दो साल बाद ही 2019 में उनके लोकसभा का टिकट मिल गया। 2021 में सबको चैंकाकर मुख्यमंत्री बन गये और इतनी ही जल्दी उन्हें हटा भी दिया गया। 2024 में उनका टिकट कट गया और अब 2026 में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बन गये। उनका जाना भी हैरान करने वाला होता है और वापिस आना भी। मगर एक चीज है जो कभी नहीं बदलती वो उनकी सौम्यता और सादगी है।
उनके प्रदेश अध्यक्ष बनने का किस्सा भी दिलचस्प है। वर्ष 2013 में जब भाजपा ने प्रदेश में संगठनात्मक बदलाव किये। तब दो बड़े नाम प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में थे। त्रिवेंद्र सिंह रावत और तीरथ सिंह रावत। दोनों को ही भाजपा संगठन का बड़ा अनुभव था। त्रिवेंद्र सिंह रावत भगत सिंह कोश्यारी की पहली पसंद थे और तीरथ सिंह रावत के पीछे रिटायर्ड मेजर जनरल स्वर्गीय भुवन चन्द्र खण्डूड़ी थे। तब पहली बार उत्तराखंड भाजपा में प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए चुनाव तक की नौबत आ गयी थी और आखिरकार तीरथ सिंह रावत को भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। हालांकि समय बदलता है त्रिवेंद्र सिंह रावत तब प्रदेश अध्यक्ष नहीं बन सके लेकिन कुछ ही सालों में प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गये और तीरथ सिंह रावत का भी समय बदला। कुछ महीनों के लिए ही सही वो भी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने।
तीरथ सिंह रावत के प्रमुख पद एक नजर में
वर्ष-अवधि जिम्मेदारी
1997-2002 उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य
2000-2002 उत्तराखंड के प्रथम शिक्षा मंत्री
2007 उत्तराखंड भाजपा प्रदेश महामंत्री
2012-2017 चौबट्टाखाल से भाजपा विधायक
2013- 2015 उत्तराखंड भाजपा प्रदेश अध्यक्ष
2013 उत्तराखंड दैवीय आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के अध्यक्ष
2017 के बाद भाजपा के राष्ट्रीय सचिव सहित संगठनात्मक जिम्मेदारियां
2019-2024 पौड़ी गढ़वाल से लोकसभा सांसद
मार्च 2021-जुलाई 2021 उत्तराखंड के मुख्यमंत्री
2026 भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष