लखनऊ: ये कहने में कोई दो राय नहीं है कि देश की राजनीति उत्तर प्रदेश से चलती है। 2014 में यूपी की जनता ने भाजपा पर भरोसा किया तो देश के हर कोने से मोदी-मोदी की आवाज़ सुनाई दी थी। 2014 से 2017 के बीच कई राज्यों में चुनाव हुए। भाजपा ने कई प्रदेश में जीत भी हासिल की और हार का भी सामना करना पड़ा लेकिन यूपी की इस ऐतीहासिक जीत ने एक बार फिर मोदीमय भारत कर दिया है। ऐसे में यूपी के सीएम के चेहरे से भाजपा के रणनीतिकार कई उम्मीदें लगाये बैठे हैं। यदि भाजपा 2019 में जीत को दोहराना चाहती है तो मोदी और शाह के बाद यूपी का सीएम तीसरी निर्णायक भूमिका में होगा लेकिन अनुभवी चेहरों के अभाव में पार्टी की मजबूरी नए चेहरों पर ही दांव खेलने की रहेगी। वैसे पार्टी गलियारे में यूपी सीएम के लिए जिन नामों पर चर्चा है उसमें गृह मंत्री राजनाथ सिंह, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष केशव मौर्य, रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा, गोरखपुर के सांसद महंत योगी आदित्य नाथ के साथ भाजपा के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा और लखनऊ के महापौर एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिनेश शर्मा का नाम शामिल है। हालांकि पार्टी के उच्च पदस्थ लोगों का कहना है कि इनके अलावा भी कोई चेहरा आगे किया जा सकता है।