देहरादून : आखिरकार कांग्रेस हाईकमान ने उत्तराखंड में नई प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा कर दी है। एक लम्बे इंतेजार के बाद प्रदेश कांग्रेस की टीम बनायी गयी है। इस इंतेजार में करण माहरा का पूरा कार्यकाल निकल गया था और अब गणेश गोदियाल को भी आधे वर्ष से ज्यादा का समय गुजर चुका है। एक अदद टीम बनाने के लिए शायद खूब मंथन करना पड़ा है और सभी धड़ो को खुश करने का प्रयास किया गया है।
इस नई कार्यकारिणी में 24 उपाध्यक्ष, 36 महासचिव और 107 सचिव बनाये गये हैं। इस कार्यकारिणी में कुछ ऐसे चेहरे है जो करीब 5 कार्यकाल से अपने पद पर कायम हैं उनमें कोई फेरबदल नहीं किया गया है। कुछ ऐसे युवा चेहरे भी हैं जिन्हें पहली बार बड़ी जिम्मेदारी मिली है।

ये चुनावी वर्ष है और कुछ महीनों के बाद पार्टी को मैदान में उतरना है और मुकाबला पहले के मुकाबले ज्यादा कठिन है। प्रदेश निर्माण के बाद एक बाद एक भाजपा और कांग्रेस को सरकार चलाने का मौका मिलता रहा है। पहली बार 2022 में भाजपा ने अपना कार्यकाल रिपीट किया था और अब 10 वर्ष भाजपा को प्रदेश में सरकार चलाते हुए पूर्ण हो जायेंगे। कांग्रेस को अधिक सजग और आगे रहने की आवश्यकता थी लेकिन कांग्रेस थोड़ी धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रही है।
इसमें कोई दो राय नहीं है कि पिछले 4 वर्षो में करण माहरा और अब गणेश गोदियाल ने कई अहम मुद्दों पर भाजपा के खिलाफ एक जबरदस्त माहौल बनाया है। सड़क पर खूब आंदोलन किये। कई मुद्दों पर सरकार असहज भी हुई लेकिन प्रदेश कांग्रेस को अपने हाईकमान का उतना साथ नहीं मिला। देवेंद्र यादव के जाने के बाद कुमारी शैलजा के कार्यकाल में प्रदेश कांग्रेस को ज्यादा तव्वोजह नहीं मिल पायी है। देवेंद्र यादव प्रदेश में कुमारी शैलजा के मुकाबले ज्यादा समय देते थे। यही वजह थी कि उस समय बड़े नेताओं के खूब दौरे लगते थे। अब पिछले 4 वर्षो में एक बार मल्लिकार्जुन खड़गे, दो बार राहुल गांधी और एक बार केसी वेणुगोपाल के दौरे तय किये गये। जिसमें एक राहुल गांधी का दौरा खराब मौसम के कारण रद्द भी करना पड़ा था। कुल मिलाकर करण माहरा के कार्यकाल में बन्नू स्कूल में मल्लिकार्जुन खड़गे और गणेश गोदियाल के कार्यकाल में अब तक राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल ही आये हैं। प्रियंका गांधी या कोई ओर कांग्रेस का बड़ा चेहरा अभी तक उत्तराखंड से दूर है।
इस नई कार्यकारिणी से उत्तराखंड कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को मनोबल जरूर बढ़ेगा लेकिन इतना होना काफी नहीं है। भाजपा संगठन विस्तार में कहीं आगे हैं। वहां दर्जनों अनुवांशिक संगठन बन चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह सहित लगभग सभी बड़े नेताओं के एक नहीं कई दौरे हो चुके हैं। विधायकों की प्रत्येक सीट का मंथन हो चुका है। वहां पन्ना प्रमुख तय है जबकि कांग्रेस मैदान में तो है लेकिन रफ्तार धीमी है। अब समय कम है और मुकाबला कड़ा है।
कांग्रेस के लिए ये मुकाबला इसलिए भी कड़ा है क्योंकि पुष्कर सिंह धामी भाजपा हाईकमान के पूर्ण विश्वास के साथ कार्य कर रहे हैं। प्रदेश में सबसे लम्बे समय तक मुख्यमंत्री बने रहने का रिकाॅर्ड बना चुके हैं। कम आयु में लम्बा अनुभव हासिल कर चुके हैं। इस मुकाबले में प्रदेश कांग्रेस से ज्यादा हाईकमान को सजग होने की आवश्यकता है। कुमारी शैलजा और उनकी टीम को ज्यादा से ज्यादा समय उत्तराखंड में बिताना होगा। बूथ लेेवल तक टीम का निर्माण करना होगा। हार-जीत अलग पहलू है लेकिन मुकाबला ऐसा तो हो कि मुकाबला लगे। कांग्रेस ने 2022 का चुनाव जबरदस्त तरीके से लड़ा था। महज कुछ गलतियां उनपर भारी पड़ी और इतनी भारी पड़ी कि सरकार बनाने का ख्वाब देखते-देखते 19 पर सिमट गयी। अब उन गलतियों से कांग्रेस ने कितना सबक सीखा है ये देखने वाली बात होगी।