नई दिल्ली : एलपीजी संकट और पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के चलते देश में ECA (आवश्यक वस्तु अधिनियम) लागू कर दिया गया है अब तेल और गैस कंपनियों को अपना डाटा साझा करना होगा। ऐसा माना जा रहा है कि आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3 देश भर में जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने में सहायक सिद्ध होगी। इस कानून के लागू होने के बाद सभी पेट्रोलियम उत्पाद और प्राकृतिक गैसों के उत्पादन, प्रसंस्करण, भंडारण, शोधन, आयात-निर्यात, मार्केटिंग और उपभोग से जुड़ी सभी कंपनियों को सरकार के पेट्रोलियम योजना और विशेष प्रकोष्ठ में अपना ताजा डाटा साझा करना अनिवार्य हो जाएगा।
आप को बता दें कि आवश्यक वस्तु अधिनियम सरकार को यह शक्ति देता है कि वे नागरिकों को उचित कीमतों पर जरूरी चीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करे, साथ ही जमाखोरी, कालाबाजारी और कृत्रिम तौर पर चीजों की कमी पैदा होने से रोके। यह कानून, देश में खाद्य सुरक्षा को बनाए रखने में मददगार होता है।
केंद्र सरकार इस कानून की धारा 3 के तहत जरूरी चीजों के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित कर सकती है और स्टॉक सीमा लगा सकती है साथ ही व्यापार को भी विनयमित कर सकती है। सरकार कीमतें तय कर सकती है और जमाखोरी पर रोक लगा सकती है। इसके साथ ही इस कानून की धारा 5 के तहत केंद्र सरकार धारा 3 के तहत मिलने वाली शक्तियों को राज्य सरकारों को सौंप सकती है, ताकि जमीनी स्तर पर इस कानून को लागू किया जा सके।
आपको बताते कि भारत अपनी उर्जा पूर्ति की कमी को काफी हद तक पश्चिम एशिया देशों से विभिन्न स्रोतों के माध्यम से पूरा करता है साथ ही भारत वेनेजुएला, रूस और अमेरिका सहित लगभग 40 देश से कच्चा तेल आयात करता है और इसके अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, नॉर्वे और रूस से प्राकृतिक गैस भी आयात करता है।