नई दिल्ली: नोटबंदी के बाद सरकार डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने की भरसक कोशिश कर रही है। इसी क्रम में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी (एनआइईएलआइटी) ने छोटे व मझोले कारोबारियों को डिजिटल पेमेंट के विभिन्न माध्यमों की ट्रेनिंग शुरू की है। आइटी व इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय के अधीन कार्यरत इंस्टीट्यूट पांच रीजनल वर्कशॉप आयोजित करेगा और 100 डिजिधन कार्यक्रम भी आयोजित करेगा। क्षेत्रीय स्तर पर कार्यक्रम दिल्ली के अलावा जयपुर, कोलकाता, चेन्नई और मुंबई में आयोजित किये जाएंगे। आइटी व इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने अभियान लांच करते हुए कहा कि हमें यह समझना होगा कि यह भारत का बदलता चेहरा है। 108 करोड़ मोबाइल फोन, 50 करोड़ इंटरनेट यूजर्स और 111 करोड़ आधार धारकों के बूते देश डिजिटल दुनिया में प्रवेश कर रहा है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब सरकार नोटबंदी के बाद डिजिटल ट्रांजैक्शन को लोगों के बीच लोकप्रिय बनाने के लिए प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि नोटबंदी को इसी बदलाव की कड़ी की तौर पर देखा जाना चाहिए, न कि एक अलग कदम। इससे भ्रष्टाचार, आतंकी फंडिग और मनी लांड्रिंग पर प्रभावी तरीके से अंकुश लगाया जा सकेगा। उन्होंने कारोबारियों से अनुरोध किया कि इस राष्ट्रीय अभियान में डिजिटल ट्रांजैक्शन को अपनायें।
इंस्टीट्यूट ने ट्रेनिंग प्रोग्राम इस तरह तैयार किया है कि व्यापारी और विक्रेता डिजिटल पेमेंट सिस्टम अपना सकें। चूंकि डिजिटल पेमेंट के कई माध्यम है। इसलिए सभी माध्यमों की तकनीकी और व्यावहारिक जानकारी व ट्रेनिंग की दी जाएगी। जिन पेमेंट माध्यमों की ट्रेनिंग की जाएगी, उनमें यूनीफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआइ), अनस्ट्रक्चर्ड सप्लीमेंट्री सर्विस डाटा (यूएसएसडी), और आधार इनेबिल्ड पेमेंट सिस्टम प्रमुख हैं।
एक सकारी विज्ञप्ति के अनुसार में इस कार्यक्रम में 13,500 छोटे व मझोले कारोबारियों और असंगठित क्षेत्र व स्वरोजगार से जुड़े विक्रेताओं को ट्रेनिंग देने का लक्ष्य है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआइटी) इन कार्यक्रमों में व्यापारियों को प्रेरित करने का प्रयास करेगा।