देहरादून : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 14 अप्रैल को देहरादून में आ रहे हैं और एशिया का सबसे लंबा ग्रीन कारिडोर (गणेशपुर से डाटकाली मंदिर तक 12 किमी) जनता को समर्पित कर दिया जायेगा। पीएम नरेंद्र मोदी के इस अहम दौरे का प्रदेशवासियों को लम्बा इंतेजार था। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे उद्घाटन के बाद दिल्ली और देहरादून की दूरी महज ढाई घंटे रह जायेगी।
यह जानकारी मिल रही है कि 13 अप्रैल से दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे में डाटकाली मंदिर से ही एलिवेटेड रोड को बंद कर दिया जायेगा। पीएम मोदी की जनसभा होने तक पुराने मार्ग से गाड़ियां निकाली जाएंगी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का काफिला आगामी 14 अप्रैल को शहर के अंदरूनी हिस्से में 14.1 किलोमीटर का सफर तय करेगा। प्रधानमंत्री मोदी हेलीकॉप्टर से गणेशपुर (सहारनपुर) में उतरेंगे और फिर एलिवेटेड रोड का निरीक्षण करते हुए कार से आईएसबीटी, जीएमएस रोड और कैनाल रोड होते हुए गढ़ी कैंट देहरादून के महिंद्रा ग्राउंड पहुंचेंगे। पीएम मोदी महिंद्रा ग्राउंड में एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे।
बताया जा रहा है कि पीएम मोदी के दौरे को लेकर डाटकाली मंदिर में हलचल बढ़ गई है। यूपी की पुलिस लगातार पहुंचकर जांच पड़ताल कर रही है। सुरक्षा के इंतजाम देखे जा रहे हैं। ये जानकारी मिल रही है कि पीएम मोदी मंदिर में मां डाटकाली के दर्शन भी करेंगे। डाटकाली मंदिर देहरादून से सहारनपुर रोड पर उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश की सीमा से सटा माता सती के नौ शक्तिपीठों में एक मनोकामना सिद्धपीठ है। देश-दुनिया से लाखों लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं। ये मान्यता है कि देहरादून व आसपास के क्षेत्रों जब भी किसी घर में नया वाहन आता है तो यहां वाहन पूजा के लिए जरूर आते हैं। इस मंदिर में अखंड ज्योत जलती है और यहां का प्रसाद लोग विदेशों तक लेकर जाते हैं। देहरादून में ये मान्यता है कि अंग्रेज जब दूनघाटी में आ रहे थे तो यहां प्रवेश के लिए उन्हें सुरंग बनानी थी। अंग्रेजों ने सुरंग का कार्य करना शुरू किया, पर लगातार काम में अड़चन आ रही थी। कहा जाता है कि एक दिन अंग्रेज इंजीनियर कर्नल कैटवे को सपने में माता के दर्शन दिए और मंदिर बनाने को कहा। इसके बाद 1936 में उन्होंने यहां मंदिर बनाया गया और मां काली की प्रतिमा स्थापित की गयी। इसके बाद सुरंग आसानी से बन गयी जो अभी तक मौजूद है। हालांकि अब वाहन नयी सुरंग से गुजरते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे उद्घाटन के बाद सफर बहुत आसान होने वाला है। इस एक्सप्रेसवे से सिर्फ ढाई घंटे में दिल्ली पहुंचने का मार्ग ही नहीं, बल्कि दिल्ली और देहरादून के निकट स्थित कई शहरों में पहुंचने का पूरा रोड नेटवर्क स्थापित हो जायेगा। करीब 210 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे दो प्रमुख एक्सप्रेसवे, साथ ही पांच नेशनल हाईवे और 10 से ज्यादा स्टेट हाइवे से कनेक्ट होकर पूरे क्षेत्र में कनेक्टिविटी का जाल फैला देगा। इस एक्सप्रेसवे पर दिल्ली-बागपत मार्ग, मेरठ-बागपत मार्ग, मेरठ-बुलंदशहर मार्ग, मुजफ्फरनगर-देवबंद-सहारनपुर मार्ग और मुजफ्फरनगर-शामली मार्ग प्रमुख हैं। अब यात्री दिल्ली में अक्षरधाम से चलकर आसपास के सभी शहरों में आसानी से जा सकते हैं। वहीं उत्तराखंड में भी देहरादून के आसपास स्थित देहरादून-मसूरी, देहरादून-ऋषिकेश और देहरादून-विकासनगर मार्ग से कनेक्टिविटी मिलने से पर्यटन स्थलों तक पहुंच और आसान हो जाएगी। इतना ही नहीं अब सोनीपत, पानीपत, कुंडली, मानेसर, गुरुग्राम,पलवल, बागपत, गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, चंडीगढ़, अंबाला और यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए आगरा तक के पर्यटक देहरादून आसानी से पहुंच सकते हैं।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर 12 किमी के ग्रीन कोरीडोर की अपनी खासियत है। ये कोरिडोर दिल्ली-देहरादून के बीच दूरी कम करने के साथ ही सफर को सुगम बना रहा, बल्कि उत्तराखंड की सीमा में गणेशपुर से डाटकाली तक बना एशिया के सबसे बड़े ग्रीन कारीडोर के रूप में भी पहचान बना चुका है। सरकार ने इस तरह ग्रीन कोरीडोर का निर्माण किया है जिससे राजाजी टाइगर रिजर्व और शिवालिक रेंज के वन्यजीवों की आवाजाही में कोई खलल न पड़े। 18 प्रजाति के वन्यजीव नीचे से आसानीपूर्वक अपना जीवन जी सकेंगे। किसी भी तरह के वाहनों के शोर के कारण वन्यजीव बिदकें नहीं, क्योंकि एलिवेटेड रोड पर साउंड बैरियर लगाए गए हैं। यही नहीं, ऐसी लाइट भी लगाई गई हैं, जिनकी रोशनी वन्यजीवों को परेशान न करे।