मौ. वसी ज़ैदी
केंद्र और राज्य के संबंध अक्सर सत्ता संतुलन, विकास और राजनीतिक समीकरणों के बीच झूलते रहते हैं। दोनों जगह सरकारें एक भी हो तो जरूरी नहीं होता कि तालमेल भी एक हो लेकिन पिछले कुछ सालों से उत्तराखंड के लिए परिदृश्य बदला हैं। इस बदलाव के पीछे पीएम नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड से खास लगाव और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शानदार बॉडिंग है। ये नजदीकियां बताती हैं कि यह संबंध केवल औपचारिक नहीं, बल्कि एक कार्यशील साझेदारी का उदाहरण बनता जा रहा है। जब भी प्रधानमंत्री उत्तराखंड का दौरा करते हैं, वे राज्य सरकार की योजनाओं की खुलकर सराहना करते हैं। बदले में, धामी सरकार भी केंद्र की योजनाओं को तेजी से लागू करने में पंक्ति में सबसे पहले दिखाई देती है। ये केंद्र सरकार के साथ तालमेल का सुनहरा दौर है। ये डबल इंजन सरकार का भी सुनहरा दौर है।
हमें याद है कि देहरादून परेड ग्राउन्ड में एक जनसभा के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा था कि डबल इंजन की सरकार ही पहाड़ में विकास कर सकती है। दो इंजन पहाड़ की चढ़ाई में थकेंगे नहीं। जनता ने उनके इस बयान को स्वीकार किया था और पहली बार इतने बंपर बहुमत की सरकार 2017 में भाजपा की बनी थी। यही सरकार मोदी-धामी की सरकार के नाम पर 2022 में रीपीट हुई। ये डबल इंजन इतना पोपुलर हुआ कि जहां-जहां भाजपा शासित सरकारें आती रही, डबल इंजन की सरकार का मुहावरा दोहराया जाता रहा लेकिन जो बॉडिंग सीएम पुष्कर सिंह धामी के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिखायी देती है वो अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों से कहीं बेहतर और अलग है।
इस बॉन्डिंग का सबसे बड़ा लाभ राज्य के विकास में दिखाई देता है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने उत्तराखंड के लिए कई महत्वाकांक्षी परियोजनाएं शुरू की हैं। चारधाम सड़क परियोजना, केदारनाथ धाम पुनर्निर्माण, हेमकुंड रोपवे, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे और रेल कनेक्टिविटी जैसे प्रोजेक्ट इसका उदाहरण हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इन परियोजनाओं को जमीन पर उतारने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनकी प्रशासनिक शैली तेज निर्णय लेने और कार्यान्वयन पर केंद्रित है, जो प्रधानमंत्री की कार्यशैली से मेल खाती है। यही कारण है कि उत्तराखंड में विकास कार्यों की गति अपेक्षाकृत तेज नजर आती है।
मोदी-धामी की यह जोड़ी भाजपा के भीतर एक स्पष्ट संदेश भी देती है कि केंद्रिय हाईकमान युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने के साथ-साथ अनुभव का संतुलन बनाए रख रहा है। पुष्कर सिंह धामी अपेक्षाकृत युवा मुख्यमंत्री हैं, और उन्हें प्रधानमंत्री का समर्थन मिलना पार्टी के भीतर उनके कद को मजबूत करता है। इसके अलावा, यह संबंध संगठनात्मक स्तर पर भी भाजपा को मजबूती देता है। चुनावी राजनीति में जब शीर्ष नेतृत्व और राज्य नेतृत्व एकजुट दिखते हैं, तो कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ता है और मतदाताओं में विश्वास पैदा होता है।

ये मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कार्यशैली हो सकती है कि ना सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बल्कि अमित शाह, राजनाथ सिंह, जेपी नड्डा, शिवराज सिंह चौहान और नीतिन गडकरी भी एक अलग आत्मीय भाव के साथ उनसे मिलते हैं। यह आत्मीय भाव केवल व्यक्तिगत समीकरण का परिणाम नहीं है बल्कि एक व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी है। भाजपा के लिए उत्तराखंड एक संवेदनशील और रणनीतिक राज्य है। धार्मिक, पर्यटन और सैन्य दृष्टि से इसका महत्व बहुत अधिक है। ऐसे में योजनायें धरातल पर उतरती रहें, उन्हें भरपूर बजट और तेज कार्यशैली मिलती रहे जनता का विश्वास जीतना फिर मुश्किल नहीं होता है। जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे लोकार्पण के दौरान कहा था कि सड़कें, कोरीडोर और एक्सप्रेसवे राष्ट्र की भाग्य रेखायें होती हैं। हम एक कदम और आगे बढ़कर कहते हैं कि हर क्षेत्र में विकास ही राष्ट्र की भाग्य रेखा है। मौजूदा सरकार इन रेखाओं का विस्तार कर रही है जो उत्तराखंड के लिहाज से आवश्यक भी है और बड़ी जिम्मेदारी भी है। क्योंकि उत्तराखंड केवल हिमालयी राज्य नहीं है, यह भारत की राजनीतिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक चेतना का एक संवेदनशील क्षेत्र है। इस सुनहरे दौर का देवभूमि को लाभ मिलना चाहिए। पूर्ण और स्पष्ट बहुमत की सरकार है। पुष्कर सिंह धामी युवा हैं, एक विजन रखते हैं, संवेदनशील है और केंद्र सरकार उनके हर फैसले में उनके साथ खड़ी है। हमें उम्मीद और भरोसा है कि उत्तराखंड के विकास में ये दौर मील का पत्थर साबित होगा।
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